संकल्प की दृढ़ता और आत्मविश्वास की (1) मनुष्य को विषम परिस्थितियों में भी अडिग रखती है। जो व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति (2) होता है, वह असफलताओं से विचलित नहीं होता। आत्मसंयम और (3) का पालन करने वाला व्यक्ति ही जीवन में वास्तविक सिद्धि प्राप्त करता है। निरंतर अभ्यास और (4) के द्वारा ही कठिन से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। जीवन में सफलता का (5) परिश्रम और धैर्य ही है।
जीवन में (1) का महत्व सर्वोपरि है। निराशा और अवसाद से घिरा व्यक्ति (2) की ओर अग्रसर होता है। आशावादी दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी (3) खोज लेता है। (4) और सकारात्मक चिंतन ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। हमें कभी भी (5) नहीं छोड़नी चाहिए।
भाषा विचारों के (1) का माध्यम है। मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना अधिक (2) होता है। जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा का (3) करता है, वह अपनी संस्कृति से विमुख हो जाता है। भाषा की (4) से ही विचारों में स्पष्टता आती है। हमें अपनी भाषा के (5) के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।
प्रकृति और मानव का संबंध अत्यंत (1) है। प्रकृति के (2) से ही मानव जीवन समृद्ध होता है। वृक्षों की (3) कटाई से पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। यदि हमने प्रकृति का (4) नहीं किया तो भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न होगा। पर्यावरण (5) आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
साहित्य समाज का (1) है। साहित्यकार अपने युग की (2) को अपने लेखन में अभिव्यक्त करता है। सत्साहित्य से पाठकों में (3) मूल्यों का विकास होता है। साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि (4) भी है। साहित्य से ही समाज में (5) का प्रसार होता है।
नेतृत्व एक (1) कला है। कुशल नेता में दूरदर्शिता और (2) दोनों होते हैं। नेतृत्व में (3) का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अहंकारी नेता कभी लोकप्रिय नहीं होता। नेता को अपने अनुयायियों के प्रति (4) होना चाहिए। सच्चा नेतृत्व (5) से नहीं, सेवा से स्थापित होता है।
तकनीक ने मानव जीवन को (1) रूप से बदल दिया है। इंटरनेट ने विश्व को एक (2) ग्राम में परिवर्तित कर दिया है। तकनीक का (3) उपयोग वरदान है, जबकि दुरुपयोग अभिशाप। युवाओं में तकनीक की (4) बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है। तकनीक और मानवीय मूल्यों में (5) आवश्यक है।
लोकतंत्र में (1) का विशेष महत्व है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की (2) हैं। नागरिकों में (3) जागरूकता लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाती है। भ्रष्टाचार लोकतंत्र के लिए (4) है। लोकतंत्र की सफलता के लिए (5) और सहिष्णुता आवश्यक है।
चरित्र मनुष्य की सबसे बड़ी (1) है। चरित्रवान व्यक्ति (2) में भी सम्मानित होता है। चरित्र का निर्माण (3) से होता है, एक दिन में नहीं। चरित्रहीन व्यक्ति की (4) क्षणिक होती है। हमें अपने चरित्र की (5) मोती की तरह करनी चाहिए।
श्रम का महत्व (1) है। श्रम से ही राष्ट्र का (2) होता है। जो श्रम से जी चुराता है, वह (3) कहलाता है। श्रमिकों के (4) के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। श्रम की (5) करना सभ्य समाज की पहचान है।
अहिंसा भारतीय संस्कृति की (1) है। गांधी जी ने अहिंसा को (2) के रूप में अपनाया। अहिंसा का अर्थ केवल हिंसा न करना नहीं, बल्कि मन में भी (3) न रखना है। अहिंसा से ही विश्व में (4) स्थापित हो सकता है। आज के (5) युग में अहिंसा और भी प्रासंगिक है।
अनुशासन जीवन की (1) है। अनुशासित व्यक्ति अपने (2) का सदुपयोग करता है। अनुशासन से ही व्यक्ति में (3) का विकास होता है। सेना में अनुशासन का (4) रूप से पालन किया जाता है। अनुशासनहीनता से जीवन में (5) फैलती है।
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